Friday, 16 September 2011

सफाई कर्मी जातियों की रोजी-रोटी निजीकरण के माध्यम से खत्म करना एक षडयंत्र है

अनुसूचित जातियो मे सफाई कर्मी जातीयां सबसे पिछड़ी है ।घृणीत काम करनेपर मजबूर होनेवाली इन जातियों को ऊपर उठाने के लिए सरकार ने कोई प्रबंध नही किया । सफाई का काम ठेकेदारी पर देकर सरकार ने केवल उनका रोजगार ही नही छिना, बल्कि ठेकेदारो को सफाई कर्मियों का शोषण करने की खुली छूट दी है ।सफाई कर्मियों को और ज्यादा लाचार करके जानवरो से भी बद्तर जिंदगी जिने पर मजबूर किया है ।इसका हम तिव्र विरोध करते है ।

कास्ट व्हेरीफिकेशन (जातीय पहचान) आरक्षण के साथ धोखेबाजी का सबूत है

जनरल कँटेगरी के द्वारा झूठे सर्टिफिकेट लेकर आरक्षण को हडप करने का षडयंत्र किया जा रहा है ।इसके विरोध मे सुप्रीम कोर्ट नेआदेश दिया था ।इस आदेश का सरकार ने SC, ST, OBC के खिलाफ उपयोग करना शुरू किया है ।कास्ट व्हेरीफिकेशन के नाम पर सरकार नेSC, ST, OBC, के प्रमोशन रोक रखे है।विद्यार्थीयो का अँडमिशन नही हो पा रहा है ।काँस्ट व्हेरीफिकेशन कि प्रक्रिया को जान बुज कर जटिल बनाया गया है ताकि समय पर कोटा हडप किया जा सके।

प्रिंट मीडिया

प्रिंट मीडिया को होने वाली कुल कमाई का लगभग 90% विज्ञापन दाता देते है और पाठक देते है 10% तो अखबार मे आपकी औकात 10 पैसे से ज्यादा की कैसे हो सकती है? आप उसमे अपना हित कैसे तलाश सकते है?
दै जागरण को 2010-11 विज्ञापन दाताओ ने 776 करोड़ दिए और पाठको ने 223 करोड़।हिंदुस्तान टाइम्स को विज्ञापन से 1391 करोड़ मिले और पाठको से 182 करोड़ ।